लोक निर्माण विभाग और वन विभाग में विकास कार्यों को लेकर गंभीर धांधली के आरोप, ठेकेदार एसोसिएशन पहुँचा हाईकोर्ट

गड़चिरोली/अहेरी प्रतिनिधि ( ख़ैसर खान )
जिले में लोक निर्माण विभाग और वन विभाग के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों को लेकर ठेकेदार एसोसिएशन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि शासन के स्पष्ट परिपत्र और नियमों को नजरअंदाज कर निविदा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की जा रही हैं, जिससे सरकारी निधि का दुरुपयोग हो रहा है।
शासन के नियमानुसार किसी भी निविदा सूची में 33% कार्य सुशिक्षित बेरोजगार अभियंताओं को, 33% मजदूर सहकारी संस्थाओं को और 34% खुला प्रवर्ग को दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन आरोप है कि इस नियम को पूरी तरह दरकिनार कर 100% कार्य मजदूर सहकारी संस्थाओं को दिए जा रहे हैं।
एसोसिएशन का यह भी आरोप है कि मजदूर सहकारी संस्थाओं के नाम पर वास्तविक मजदूर काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि बाहरी मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है। इसकी जांच और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित कार्यकारी अभियंता और उप विभाग अभियंता की होती है, लेकिन वे अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके चलते सरकार की करोड़ों रुपये की निधि का गलत उपयोग हो रहा है और वास्तविक मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा यह सामने आया है कि अलापल्ली जूडिशियल क्षेत्र में शासन द्वारा प्रत्येक कार्यकारी अभियंता का कार्यक्षेत्र निर्धारित किया गया है। नियम के अनुसार यदि किसी अन्य क्षेत्र का कार्यकारी अभियंता वहां काम करता है तो उसे संबंधित क्षेत्र के कार्यकारी अभियंता से अनुमति लेना आवश्यक है। बावजूद इसके, अलापल्ली क्षेत्र के लोक निर्माण विभाग के कार्य गड़चिरोली लोक निर्माण विभाग क्रमांक 2 द्वारा बिना अनुमति के निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किए जा रहे हैं।
इन सभी कथित अनियमितताओं और धांधलियों के विरोध में अहेरी ठेकेदार एसोसिएशन ने नागपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में रिट पिटीशन क्रमांक 8639/2026 दाखिल की गई है। अब इस पूरे प्रकरण में हाईकोर्ट क्या फैसला देता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
ठेकेदार एसोसिएशन का आरोप है कि प्रशासन द्वारा विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं रखी जा रही है और कथित रूप से आर्थिक लेन-देन कर चुनिंदा ठेकेदारों को ही काम आवंटित किए जा रहे हैं।

