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काॅकरोच जनता पार्टी, मांग और घोषणापत्र थामे आक्रोशित, विक्षुब्ध उद्वेलित बेरोजगार युवाओं का डिजिटल विद्रोह है !

21 मई 2026 शेख़ अंसार द्वारा

आजादी के बाद, ये आजादी झूठी है, देश की जनता भूखी है, के गगनभेदी नारों के साथ जल जंगल जमीन, मजदूर – किसान, दलित, आदिवासी अपने रोजमर्रा की जिन्दगी के लिए जद्दोजहद करती सड़क से लेकर संसद तक, धरना, प्रदर्शन, भूख-हड़ताल, सत्याग्रह चक्काजाम, जेलभरो आन्दोलन करती रही है, हुकूमत किसी भी दल की रही, जनता की उठती मांगों को कुचलने के लिए जनता की छाती को गोलियों से भूनती रहीं है। भारत के सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय हो प्रादेशिक दल सभी ने भारतीयों के छाती को दमन – सितम के गोलियों से लहुलुहान किया है।

डिजिटल विद्रोह भी पूंजीवादी लोकतंत्र के न्यायपालिका के आत्ममुग्ध प्रधान न्यायाधीश के वाचाल श्रीमुख की उपज है।

देश के सर्वोच्च न्यायालय का प्रधान न्यायाधीश एक केस के सुनवाई के दौरान प्रसंग – प्रकरण से हटकर आत्ममुग्धता में सन्दर्भहीन बकैती करने लग जाते हैं, मुख्य न्यायाधीश जैसे प्रतिष्ठित आसंदी पर बैठकर जस्टिस सूर्यकांत युवाओं के खिलाफ काॅकरोच और परजीवी जैसे आपत्तिजनक शब्द कह देते हैं। युवाओं के लिए प्रधान न्यायाधीश द्वारा बोलें गए आपत्तिजनक शब्द युवाओं के आत्मसम्मान को झकझोर कर दिया है। सात समुंदर पार बाॅस्टन युनिवर्सिटी में पढ़ने वाला अभिजीत दिपके ने पहलकदमी लेते युवाओं के आक्रोश को डिजिटल मीडिया के माध्यम से विद्रोह करने का अभियान चलाया है सोशल मीडिया के इस प्लेटफार्म पर लाखों युवाजन आत्मविश्वास के साथ शामिल होते जा रहे है।

सलाम – ए – सुबह …

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