
भाग -१
RCR (रोड-कम-रेल) परिवहन व्यवस्था की आड़ में कोयले की हेराफेरी की चर्चा
नागपुर, ब्यूरो। नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC) में कोयले की आपूर्ति से जुड़े ठेकों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कोयले की आपूर्ति के लिए जारी रोड-कम-रेल (RCR) परिवहन ठेकों में कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर कोयले की हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। चर्चा है कि कुछ कोयला कारोबारी इन ठेकों के माध्यम से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने तैयारी में है। ऐसी आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL-वेकोली) वनी क्षेत्र की कुछ खदानों से NTPC के विद्युत केंद्रों के लिए खरीदे गए कोयले को रेल साइडिंग तक पहुंचाकर रेलवे रैक के जरिए निर्धारित संयंत्रों में भेजा जाना है। इसी परिवहन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की चर्चा सामने आ रही है।
सरकार को करोड़ों के नुकसान की आशंका
यदि निर्धारित संयंत्रों तक पहुंचने वाला कोयला बाहरी बाजार में बेच दिया जाता है या उसकी जगह कम गुणवत्ता वाली सामग्री पहुंचाई जाती है, तो सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा हो सकती है। इससे विद्युत केंद्रों को अपेक्षित गुणवत्ता का ईंधन नहीं मिलने के साथ उत्पादन लागत और उपकरणों के रखरखाव पर भी असर पड़ सकता है।
कोयले की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता, परिवहन के दौरान वजन में संभावित कमी और भुगतान किए गए बिलों का मिलान करने से ही हेराफेरी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
NTPC प्रबंधन से निष्पक्ष जांच की मांग
इस मामले में NTPC प्रबंधन, वेकोली अधिकारियों और संबंधित निगरानी एजेंसियों को ठेकों की शर्तों, डिस्पैच रिकॉर्ड, रेलवे रैक के विवरण, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट तथा संयंत्रों में प्राप्त कोयले के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए।
यदि जांच में हेराफेरी, मिलावट या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि इन गंभीर आशंकाओं पर NTPC प्रबंधन और संबंधित एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं?
कैसे होगी कोयला चोरी और मिलावट भाग – २ में

