IAS अफसर मनपा आयुक्त अकुनूरी नरेश के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर?
अवैध निर्माण करता के हौसले बुलंद अब रात की बजाय दिन में हो रहा अवैध निर्माण

चंद्रपुर :- चंद्रपुर शहर महानगर पालिका में चंद महीनों पहले आयुक्त पद का पदभार संभालने वाले पहले IAS अफसर अकुनूरी नरेश के कार्यकाल में चंद्रपुर महानगर पालिका प्रशासन भ्रष्टाचार के मामले में चरम पर दिखाई दे रहा है। इस IAS आयुक्त के कार्यकाल में अवैध निर्माण करता बेलगाम नजर आ रहे है। और महानगर पालिका प्रशासन अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के मामले में नया अध्याय लिखने जा रहा है? रात के समय में चलने वाला अवैध निर्माण अब दिन दहाड़े शुरू हैं। IAS आयुक्त सहित महानगर पालिका प्रशासन कुंभकरण की नींद में सोता दिखाई दे रहा है। स्थानिकों की शिकायत के बावजूद ऐसे अवैध निर्माण कार्यों पर अगर कार्रवाई नहीं होती तो। सामान्य इंसान किससे शिकायत करे ऐसा सवाल स्थानिकों द्वारा उठाया जा रहा है।
स्थानिकों द्वारा इस मामले की शिकायत सहायक आयुक्त से ले कर तो आयुक्त तक की गई। इसके बावजूद भी महानगर पालिका प्रशासन के अफसरों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। जिससे महानगर पालिका प्रशासन के IAS आयुक्त अकुनूरी नरेश का कार्यकाल भ्रष्टचार के लिए अमृत काल होता दिखाई दे रहा है?
अवैध निर्माण करता के हौसले बुलंद
चंद्रपुर शहर के मुख्य मार्ग कस्तूरबा रोड पर चल रहे अवैध निर्माण महानगर पालिका प्रशासन की भ्रष्ट निति के चलते काफी बुलंद नजर आरहे है। चंद्रपुर महानगर पालिका प्रशासन के आशीर्वाद से अब रात की बजाय दिन में अवैध निर्माण कार्य काफी जोरो पर चल रहा है? और महानगर पालिका प्रशासन केवल मूकदर्शक बन नियमों के उल्लंघन का तमाशा देख रहा है।
बिका हुआ महानगर पालिका प्रशासन इसलिए कार्रवाई नहीं करता?
जब स्थानिकों ने इस अवैध निर्माण की शिकायत की थी उसपर महानगर पालिका प्रशासन द्वारा खानापूर्ति कार्रवाई कर स्थानिकों के कार्रवाई की उम्मीद जगाई पर अवैध निर्माण करता द्वारा स्थानिकों कटाक्ष करते हुए महानगर पालिका प्रशासन को खरीदने की बात कही गई। और कहा कि नीचे से ले कर ऊपर तक सभी अफसरों को खरीद लिया है। कोई मेरे खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा। तुम्हारी शिकायत से मेरा कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। सभी लें दे कर सेट है। ऐसी चर्चा स्थानिकों में धूम मचा रही है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या IAS अफसर भी बिक चुके है? क्या महानगर पालिका प्रशासन को चंद पैसों में खरीदा जा सकता है? क्या पैसे वाले लोग प्रशासन को अपनी जेब में रखते है? ऐसे कई सवाल स्थानिकों द्वारा दबी आवाज में चर्चा का विषय बने हुए है।

