चंद्रपुर महानगर पालिका प्रशासन कार्रवाई के नाम पर झिरो
अवैध निर्माण पर रोक लगाने में उपायुक्त संदीप चिद्रवार भी फेल रात के समय बेधड़क चल रहा अवैध निर्माण

चंद्रपुर :- चंद्रपुर महानगरपालिका द्वारा बीते वर्षों में कोनेरी तलाव, बाबूपेठ और नागपुर रोड क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर सख्त कार्रवाई की गई थी। उस समय जेसीबी और अतिक्रमण पथक की मदद से कुल चार अवैध निर्माणों को हटाया गया था। इनमें कोनेरी तलाव के पास जेल के पीछे गफ्फुर शेख का निर्माण, बाबूपेठ हुडको कॉलोनी में चरण पोरटे और सुरेश डाबरे के निर्माण, तथा नागपुर रोड पर अमित व अभिषेक येरगुडे की लगभग 1100 वर्ग फुट की दो मंजिला इमारत शामिल थी।
हालांकि अब वही महानगरपालिका प्रशासन एक अन्य अवैध निर्माण के मामले में चुप्पी साधे हुए नजर आ रहा है, जिससे उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
एक ही शहर, अलग-अलग नियम?
शहर के मुख्य मार्ग पर स्टेट बैंक के सामने संजय लस्सी के बगल में अवैध निर्माण कार्य लगातार जारी है। यह मामला नया नहीं, जिस पर पहले भी शिकायतें हो चुकी हैं और तत्कालीन आयुक्त द्वारा निर्माण कार्य पर रोक भी लगाई गई थी। इसके बावजूद अब फिर से बिना किसी वैध अनुमति के, खासकर रात के समय तेजी से निर्माण किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बीते वर्षों में मनपा ने अन्य अवैध निर्माण कार्यों पर बुलडोजर कार्रवाई की थी, तो इस अवैध निर्माण पर अब तक बुलडोजर जैसी कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहे है मानपा प्रशासन के अधिकारी?
एक ही मालिक के कई अवैध निर्माण, प्रशासन खामोश क्यों?
सूत्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति का यह निर्माण है, उसी के नाम पर शहर में अन्य कई विवादित निर्माण भी जुड़े हुए हैं। जामा मस्जिद के सामने स्थित लू लू मॉल का मामला भी पहले से विवादों में रहा है, जहां नियमों के उल्लंघन के बावजूद निर्माण पूरी तरह नहीं रुक पाया था। अब उसी मालिक द्वारा एक के बाद एक नए अवैध निर्माण किए जाने की चर्चा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर रचना विभाग और अतिक्रमण पथक के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण इस निर्माण पर कार्रवाई नहीं हो रही। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में इसको लेकर व्यापक चर्चा है।
अवैध निर्माण कार्य पर रोक लगाने में उपायुक्त संदीप चिद्रवार भी फेल
इस पूरे मामले में अब महानगरपालिका चंद्रपुर के उपायुक्त संदीप चिद्रवार की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। जब शहर में अवैध निर्माण तोड़ने की कार्रवाई पहले की जा चुकी है, तो अब इस मामले में देरी या चुप्पी क्यों? क्या प्रशासन किसी दबाव में काम कर रहा है या फिर सिर्फ चयनात्मक कार्रवाई की जाती है?
जनता का भरोसा डगमगाया
लगातार हो रही अनदेखी और पुराने मामलों के बावजूद कार्रवाई न होने से नागरिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो अवैध निर्माणों को बढ़ावा मिलेगा और कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि महानगरपालिका प्रशासन इस पुराने लेकिन गंभीर मामले में कब और कैसी कार्रवाई करता है, या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
इस मामले में महानगर पालिका प्रशासन का पक्ष जानने के लिए उपायुक्त संदीप चिद्रवार को फोन कर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया जिससे उनका पक्ष नहीं जान पाए है।

