मेडिकल अनफिट प्रमाणपत्र पर बवाल, डॉक्टरों से लेकर अधिष्ठाता तक सवालों के घेरे में
पत्रकार परिषद में मनोज ठेंगने ने लगाए गंभीर आरोप

चंद्रपुर : शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं सरकारी अस्पताल, चंद्रपुर में पुलिस हिरासत में मौजूद एक आरोपी को कथित रूप से मेडिकल अनफिट प्रमाणपत्र दिए जाने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। इस पूरे प्रकरण में अस्पताल के संबंधित डॉक्टरों के साथ-साथ शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, चंद्रपुर के अधिष्ठाता डॉ. मिलिंद कांबळे की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
लोक जनशक्ती पार्टी (रामविलास) के चंद्रपुर जिलाध्यक्ष मनोज ठेंगणे ने 31 अगस्त 2026 को आयोजित पत्रकार परिषद में इस मामले को सामने रखते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस हिरासत में आरोपी को मेडिकल अनफिट प्रमाणपत्र देने का आरोप
ठेंगणे के अनुसार, रामनगर पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 1030/2026 के तहत विभिन्न धाराओं में आरोपी जितेंद्र मिठूलाल सारसर पुलिस हिरासत में था। 23 अगस्त 2026 को सीने में दर्द की शिकायत के बाद उसे सरकारी अस्पताल लाया गया।
आरोप है कि आरोपी की पर्याप्त शारीरिक जांच और दस्तावेजों की आवश्यक पड़ताल किए बिना उसके कथित मौखिक बयान के आधार पर मेडिकल अनफिट प्रमाणपत्र जारी किया गया। इस प्रमाणपत्र में आरोपी को मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दमा जैसी बीमारियां होने तथा उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता होने का उल्लेख किए जाने का दावा किया गया है।
ठेंगणे ने दावा किया कि प्रमाणपत्र में आवक-जावक क्रमांक नहीं था, जबकि उस पर प्रोफेसर एवं एचओडी, मेडिसिन, जी.एम.सी.एच चंद्रपुर की मुहर होने की बात कही गई है।
डॉक्टर के कथित बयान से मामला और गंभीर
पत्रकार परिषद में दावा किया गया कि जब इस प्रमाणपत्र को लेकर अधिष्ठाता डॉ. मिलिंद कांबळे से सवाल किया गया, तो संबंधित डॉक्टर श्वेता को कार्यालय में बुलाया गया। ठेंगणे के अनुसार, डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा कि प्रमाणपत्र उनके हाथ से नहीं लिखा गया और उस पर लगी मुहर भी उन्होंने नहीं लगाई, जबकि प्रमाणपत्र पर उनके हस्ताक्षर होने की बात कही गई।
यदि यह दावा सही है तो सवाल यह है कि डॉक्टर श्वेता के अनुसार प्रमाणपत्र उन्होंने तैयार नहीं किया, तो फिर उस पर हस्ताक्षर कैसे किए? प्रमाणपत्र पर मुहर किसने लगाई और उसे आधिकारिक रूप से जारी किस प्रक्रिया के तहत किया गया?
नए प्रमाणपत्र ने खड़े किए अधिष्ठाता की भूमिका पर सवाल
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपों के अनुसार बाद में न्यायालय के समक्ष एक नया मेडिकल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया। ठेंगणे का दावा है कि इस प्रमाणपत्र में आरोपी के अस्पताल में भर्ती होने की तारीख में बदलाव दिखाई देता है। इतना ही नहीं, आरोपी को मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दमा नहीं होने का उल्लेख भी किए जाने की बात कही गई है।
अस्पताल के रिकॉर्ड में दोनों प्रमाणपत्रों की एंट्री किस प्रकार दर्ज है? और सबसे अहम सवाल—यदि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता हुई, तो बतौर अधिष्ठाता डॉ. मिलिंद कांबळे ने जिम्मेदारी तय करने के लिए अब तक कौन-सी ठोस कार्रवाई की?
“कार्रवाई करेंगे, कब करेंगे बताने की जरूरत नहीं” — आरोप
ठेंगणे ने पत्रकार परिषद में दावा किया जब उन्होंने अधिष्ठाता से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी, तब उन्हें कथित तौर पर जवाब दिया गया कि “हम कार्रवाई करेंगे और कब करेंगे, यह आपको बताने की जरूरत नहीं।”
अगर यह कथित बातचीत सही है, तो यह भी सवाल उठता है कि एक गंभीर मेडिकल प्रमाणपत्र विवाद में कार्रवाई की स्थिति को सार्वजनिक या शिकायतकर्ता के समक्ष स्पष्ट करने में अस्पताल प्रशासन को क्या आपत्ति है?
क्या वरिष्ठ स्तर पर भी तय होगी जवाबदेही?
ठेंगणे ने आरोप लगाया कि मामले में केवल संबंधित डॉक्टर की भूमिका की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रमाणपत्र जारी होने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रमाणपत्र जारी करने के पीछे आर्थिक लेन-देन की आशंका है।
ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने भी यह महत्वपूर्ण सवाल होगा कि प्रमाणपत्र किसने तैयार किया, किसने हस्ताक्षर किए, किसने मुहर लगाई, अस्पताल के रिकॉर्ड में इसकी एंट्री कैसे हुई और बाद में दूसरा प्रमाणपत्र किस आधार पर तैयार किया गया।
निष्पक्ष जांच की मांग
लोक जनशक्ती पार्टी (रामविलास) के जिलाध्यक्ष मनोज ठेंगणे ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि अधिष्ठाता डॉ. मिलिंद कांबळे इन गंभीर सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और अस्पताल प्रशासन इस पूरे प्रकरण में क्या कार्रवाई करता है।

